NIMHANS for research : शोध को नई दिशा: जुवेनाइल हंटिंगटन रोग के पहले मस्तिष्क का निमहंस में दान

NIMHANS for research बेंगलुरु: दुर्लभ आनुवंशिक तंत्रिका-अपक्षयी विकार जुवेनाइल हंटिंगटन रोग (JHD) पर शोध को देश में एक बड़ी सफलता मिली है। एक अभूतपूर्व कदम के तहत, जुवेनाइल हंटिंगटन रोग से पीड़ित एक मरीज़ के परिवार ने अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस), बेंगलुरु को उनके मस्तिष्क का दान किया है। डॉक्टरों के अनुसारbसंस्थान के ब्रेन बैंक में यह JHD मस्तिष्क का पहला दान है।

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के यम्मिगनूर मंडल के कलागोटला गाँव के निवासी जगदीशा (Jagadeesha) का 2017 में पहली बार निमहंस में मूल्यांकन किया गया था। दुख की बात यह है कि उन्होंने अपने पिता से यह उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) विरासत में पाया था जिन्हें 30 के दशक में इसके लक्षण दिखाई दिए थे। उनकी बड़ी बहन में भी 18 साल की उम्र में इस बीमारी का पता चला था। JHD, हंटिंगटन रोग (HD) के सभी मामलों में लगभग 6% होता है और इसे अभी भी ठीक से समझा नहीं जा सका है। यह दान शोधकर्ताओं को इस दुर्लभ और गंभीर बीमारी को आणविक और कोशिकीय स्तर पर समझने में मदद करेगा, जिससे भविष्य में बेहतर निदान और उपचार की राह खुल सकती है।

निमहंस को पिछले साल एक वयस्क हंटिंगटन रोग (HD) के मरीज़ का पहला मस्तिष्क दान प्राप्त हुआ था जिस पर शोधकर्ताओं ने अध्ययन शुरू कर दिया है। JHD मस्तिष्क का यह दानbजिसे डॉक्टरों ने ‘उदारता का कार्य’ बताया है अनुसंधान के लिए उपलब्ध मानव ऊतक (Human Tissue) की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण है।

हंटिंगटन रोग सोसाइटी ऑफ इंडिया (HDSI) के अध्यक्ष वेंकटेश्वर राव कौशिक ने बताया कि देखभाल करने वालों को भारी बोझ उठाना पड़ता है और उन्नत चरणों में रोगियों को बहु-विषयक (multidisciplinary) और प्रशामक देखभाल (palliative care) की आवश्यकता होती है। उन्होंने सरकार से HD को दुर्लभ बीमारी के रूप में मान्यता देने और पश्चिमी देशों की तरह विशेषज्ञों के साथ समर्पित केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया। इस दान से शोधकर्ता सीधे मानव मस्तिष्क के ऊतकों (tissues) पर काम कर सकेंगे जो हंटिंगटन और जुवेनाइल हंटिंगटन रोगों के गहन अध्ययन के लिए एक अमूल्य संसाधन साबित होगा।

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