ISRO chief नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी नारायणन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। नारायणन ने कहा कि नासा और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित निसार उपग्रह को 7 नवंबर को आधिकारिक तौर पर ऑपरेशनल घोषित किया जाएगा। यह उपग्रह पृथ्वी की सतह की निगरानी करने में सक्षम होगा और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
निसार उपग्रह की विशेषताएं
निसार उपग्रह में दो एसएआर सिस्टम हैं – एल-बैंड और एस-बैंड सेंसर। एल-बैंड रडार घने जंगलों की छतरी के आर-पार डाटा एकत्र कर सकता है और इससे मिट्टी में नमी, घनी वनस्पति और जमीन व बर्फ की सतहों की गति मापी जा सकती है। वहीं एस-बैंड रडार छोटे पौधों और घास के इलाकों की स्थिति को बेहतर ढंग से पकड़ सकता है। यह कृषि भूमि घास वाले पारिस्थितिक तंत्र और बर्फ में नमी का अध्ययन करने में सक्षम है। दोनों रडार प्रणाली बादलों और बारिश के बीच दिन-रात किसी भी समय डाटा एकत्र कर सकती हैं।
निसार उपग्रह का महत्व
निसार उपग्रह का महत्व इस बात में है कि यह पृथ्वी की सतह की निगरानी करने में सक्षम होगा और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा। यह उपग्रह प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में मदद करेगा। निसार उपग्रह के डेटा का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है जैसे कि कृषि, वनस्पति, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन।
इसरो की भविष्य की योजनाएं
इसरो प्रमुख ने कहा कि गगनयान मिशन का पहला मानव रहित परीक्षण जनवरी में किया जाएगा। इसके अलावा भारत 2028 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल लॉन्च करने की योजना बना रहा है और 2035 तक इसके पांचों मॉड्यूल पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन 52 टन का होगा जिसमें तीन से चार अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक और छह सदस्य तक कम अवधि के मिशनों के लिए रह सकेंगे।