नई दिल्ली :- भारत के कॉरपोरेट जगत में टाटा ट्रस्ट का नाम भरोसे और पारदर्शिता की मिसाल माना जाता है। लेकिन हाल ही में रतन टाटा के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक मेहली मिस्त्री ने ट्रस्ट से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। मेहली मिस्त्री लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े रहे हैं और उन्होंने संगठन के कई महत्वपूर्ण निर्णयों में अहम भूमिका निभाई है। उनके इस्तीफे ने उद्योग जगत में हलचल मचा दी है क्योंकि उन्हें रतन टाटा के सबसे नजदीकी और भरोसेमंद व्यक्तियों में गिना जाता था।
सूत्रों के अनुसार मेहली मिस्त्री ने निजी कारणों से यह फैसला लिया है हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। जानकारों का मानना है कि उनके जाने से टाटा ट्रस्ट की रणनीतिक टीम में एक बड़ी कमी महसूस की जाएगी। मेहली मिस्त्री का योगदान ट्रस्ट की नीतियों और सामाजिक पहलों में महत्वपूर्ण रहा है जहां उन्होंने शिक्षा स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई पहलें शुरू की थीं।
टाटा ट्रस्ट हमेशा से अपने मूल्यों और नैतिकता के लिए जाना जाता है और इसी वजह से इस संगठन ने भारत में समाजसेवा और औद्योगिक विकास दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मेहली मिस्त्री का इस्तीफा जहां एक युग के अंत जैसा प्रतीत हो रहा है वहीं यह ट्रस्ट के भविष्य की दिशा को लेकर नए सवाल भी खड़े कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में टाटा ट्रस्ट को नए नेतृत्व और रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि संगठन की पारंपरिक पहचान और आधुनिक दृष्टि के बीच संतुलन कायम रहे। रतन टाटा और उनके करीबी सहयोगियों की इस यात्रा में यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।