CJI Gavai : कानूनी सहायता केवल दान नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य: सीजेआई गवई

CJI Gavai नई दिल्ली:- भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा है कि कानूनी सहायता केवल दान नहीं है बल्कि यह एक नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न्याय हर नागरिक तक पहुंचे।

सीजेआई गवई ने राष्ट्रीय कानूनी सहायता प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी भूमिका को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करना केवल एक दान नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक सेवा है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है। सीजेआई गवई ने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एनएएलएसए और राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरणों को एक सलाहकार समिति का गठन करना चाहिए जिसमें वर्तमान और भविष्य के कार्यकारी अध्यक्ष शामिल हों। यह समिति कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालिक योजना बनाएगी और इसे लागू करेगी।

सीजेआई गवई ने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी भूमिका को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करना केवल एक दान नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक सेवा है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है। इस कार्यक्रम में एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश उपस्थित थे। सीजेआई गवई ने कहा कि कानूनी सहायता प्रदान करना एक नैतिक कर्तव्य है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न्याय हर नागरिक तक पहुंचे।

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