नई दिल्ली :- दिल्ली के लाल किले के पास हुए जोरदार धमाके ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार की शाम को लाल किला मेट्रो स्टेशन के नजदीक एक कार में अचानक हुए विस्फोट से पूरा इलाका दहशत में आ गया। धमाका इतना तेज था कि आसपास के लाल मंदिर के शीशे टूट गए और नजदीकी दुकानों को नुकसान पहुंचा। मौके पर लोगों में भगदड़ मच गई और चारों तरफ धुआं फैल गया।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके के तुरंत बाद कुछ लोग घायल अवस्था में दिखाई दिए जिनमें से कुछ को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह मामला योजनाबद्ध विस्फोट का लग रहा है और हर एंगल से जांच की जा रही है।
राजधानी दिल्ली पहले भी ऐसे कई धमाकों का दर्द झेल चुकी है। वर्ष 2005 में सरोजिनी नगर धमाका 2011 में हाईकोर्ट ब्लास्ट और 2008 में एक के बाद एक मार्केट धमाकों ने लोगों की यादों में गहरा जख्म छोड़ा था। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के कई कदम उठाए गए थे लेकिन लाल किले जैसे संवेदनशील इलाके में दोबारा धमाका होना चिंताजनक है।
एनएसजी और एनआईए की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और विस्फोट के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक स्थानीय रूप से तैयार किया गया था या बाहर से लाया गया।
दिल्ली प्रशासन ने सभी प्रमुख स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी है और मेट्रो स्टेशन सहित बाजारों में जांच कड़ी कर दी गई है। आम नागरिकों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। राजधानी में फैले डर के बीच अब हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस धमाके के पीछे कौन सा चेहरा छिपा है।