Air India Flight Crash नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे की जांच को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसी जांचों का उद्देश्य किसी पर दोषारोपण करना नहीं बल्कि हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। अदालत ने कहा कि विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच “दंडात्मक” नहीं, बल्कि “निवारक” दृष्टिकोण से की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब अदालत में एयर इंडिया फ्लाइट 171 दुर्घटना से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। यह हादसा 1978 में हुआ था जब एयर इंडिया का विमान मॉन्ट ब्लांक पर्वत (Mount Blanc) से टकरा गया था जिसमें सभी यात्रियों की मौत हो गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विमान हादसे की जांच केवल यह समझने के लिए की जाती है कि दुर्घटना कैसे हुई ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। अदालत ने कहा, “जांच प्रक्रिया का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना नहीं है विमानन सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना है। यह सीखने की प्रक्रिया है सज़ा देने की नहीं।” याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि जांच रिपोर्ट में कुछ तथ्यों को छिपाया गया है और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि अगर किसी भी अधिकारी की लापरवाही या गलती साबित होती है तो वह प्रशासनिक कार्रवाई का विषय हो सकता है, लेकिन जांच का मूल उद्देश्य “सुरक्षा तंत्र में सुधार” होना चाहिए न कि “दोष तय करना।”
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को निर्देश दिया कि विमानन हादसों से संबंधित जांच रिपोर्टों को पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से सुलभ बनाया जाए ताकि इससे मिलने वाले सबक भविष्य की सुरक्षा मानकों को और मजबूत कर सकें। अदालत की यह टिप्पणी विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह स्पष्ट करती है कि हवाई हादसों की जांच का मकसद केवल जिम्मेदारों को ढूंढना नहीं, बल्कि सुरक्षित उड़ानों के लिए तंत्र को और बेहतर बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने अंत में कहा कि “हर हादसा एक सीख है और उस सीख को भविष्य की सुरक्षा में बदलना ही सच्चा न्याय है।”