Bhar Election 2025 पटना:- बिहार विधानसभा चुनाव के मतगणना दिन पर एनडीए की जीत की उम्मीदें इन तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी हुई हैं। पहला स्तंभ है नीतीश कुमार का राजनीतिक एवं सामाजिक पूँजी। दूसरा है महिला वोट बैंक में बढ़त और तीसरा ‘सामाजिक गणित’ अर्थात जात-ओबीसी-दलित-महिला समीकरण में गठबंधन को मिली बढ़त।
नीतीश कुमार पिछले करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। इस बार एनडीए ने उन्हें एक भरोसेमंद चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने चुनावी मुहिम में 84 रैलियों में भाग लिया और भाजपा ने भी 14 रैलियों में सक्रिय दिखा। इससे गठबंधन को नेतृत्व-विश्वास मिला है कि नीतीश कारक अब भी काम कर सकता है।
महिला मतदाताओं में एनडीए को अनुपात में बढ़त हासिल दिख रही है। मतदान में महिलाओं ने पुरुषों को करीब 8.8 प्रतिशत अंक से पीछे छोड़ा है जो सरकार के लिए सकारात्मक संकेत है। महिला कल्याण योजनाओं जैसे ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ भी इसे पुष्ट करती हैं जिसमें एक लाख से अधिक महिलाओं को इन योजनाओं के तहत लाभ देने का प्रावधान है।
सामाजिक गणित यानी जात-ओबीसी-दलित-अलग-अलग समूहों के बीच गठबंधन का समीकरण, इस बार एनडीए के पक्ष में दिख रहा है। विपक्षी महागठबंधन को चुनौती मिल रही है क्योंकि छोटे सहयोगियों का पिछली बार विरोधी गुट में होना इस बार एनडीए को लगभग 5 प्रतिशत सामाजिक लाभ दे रहा है। हालाँकि कई छेत्रों में मुकाबला कड़ा है और अनुमान यह भी है कि परिणाम एकदम स्पष्ट नहीं हो सकते। कुछ सर्वेक्षणों में सीटों का आंकड़ा एनडीए-महागठबंधन के बीच निकट दिखा है।