U.S. proposal अमेरिका:- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गाज़ा पट्टी के लिए अमेरिका द्वारा पेश किए गए स्थिरीकरण बल के प्रस्ताव को रूस चीन तथा कुछ अरब देशों ने कड़ा विरोध जताया है। यू.एस. ने इस प्रस्ताव में गाज़ा में 2027 तक की अवधि के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बल तैनात करने और एक अस्थायी प्रशासनिक निकाय शांति बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। चर्चा का केंद्र इस बात पर रहा है कि प्रस्ताव में पीए को संक्रमण-शासी भूमिका में शामिल नहीं किया गया है जिसे विरोधियों ने बहुत बड़ी कमी माना है।
रूस व चीन ने प्रस्ताव में मौजूद इस अस्थायी बोर्ड को पूरी तरह हटाने की मांग की है। इसके अलावा, प्रस्ताव में गज़ा में इस बल के अधिकार, प्रतिरूप (मैंडेट), संचालन और पारदर्शिता को लेकर अनेक अस्पष्टता देखने को मिली है। अरब देशों — विशेष रूप से यूएई — ने यह कहा है कि इस प्रस्ताव में ठीक-ठीक ढाँचा, भूमिकाएँ एवं कार्यप्रणाली स्पष्ट नहीं है, इसलिए वे भागीदारी के लिए तैयार नहीं हैं। यू.एस. का तर्क है कि गाज़ा में जल्द से जल्द स्थिरता लाना आवश्यक है और यदि प्रस्ताव में देरी हुई तो वह उन देशों के साथ ‘वंचित’ भागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं, जिसे उन्होंने “चयनित देश गठबंधन” कहा है।
मुख्य विवाद के बिंदु यह हैं:
- गाज़ा में अस्थायी प्रशासन-बोर्ड का गठन: किसके नियंत्रण में होगा, सदस्यों की नियुक्ति कैसे होगी?
- पीए की भूमिका एवं भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का मार्ग: प्रस्ताव में यह स्पष्ट नहीं था।
- इस बल का मापदंड (मैंडेट)- किसे, किस सीमा तक क्या निष्पादन करना होगा — हथियार निरस्त्रीकरण गाज़ा से विदेशी सेना-बल की वापसी आदि।
इस तरह अमेरिका का यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में नए द्वंद्व का कारण बन गया है। अब देखने की बात है कि सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव को पारित कराने में अमेरिका कितना सफल होता है और विरोधी देशों को मनाने की उसकी रणनीति कैसे काम करती है।