आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में न्यायपूर्ण दृष्टिकोण की जरूरत

नई दिल्ली :- देश में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है। हाल ही में दिल्ली विस्फोट मामले से जुड़े आरोपियों के घर गिराने पर उठी बहस ने एक बार फिर इस विषय पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को कठोर कदम उठाने चाहिए लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्दोष लोगों को नुकसान न पहुंचे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को न्यायपूर्ण सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और यह सिद्धांत किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होना चाहिए।

आम जनता का मानना है कि आतंकवाद जैसे घिनौने अपराध में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जांच संस्थाएं सबूतों के आधार पर कार्रवाई करें ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हुआ कि कुछ लोग वास्तविक अपराध से जुड़े नहीं थे। इसलिए बिना पूरी जांच के भारी कार्रवाई करना सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

इस तरह की घटनाओं के बाद समाज में भय का वातावरण पैदा हो जाता है। ऐसे समय में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे जनता का भरोसा बनाए रखें। न्याय और सुरक्षा दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और किसी भी देश की स्थिरता इन्हीं पर आधारित होती है। जब कानून का पालन सख्ती के साथ और समान रूप से किया जाता है तो लोगों का राज्य पर विश्वास मजबूत होता है।

इसके साथ यह भी आवश्यक है कि आतंकवाद की जड़ तक पहुंचने के लिए व्यापक रणनीति बनाई जाए। केवल घरों को गिराने या कठोर दंड देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर मिलकर ऐसा वातावरण बनाया जाए जिसमें आतंकवाद को पनपने का अवसर ही न मिले। इस दिशा में संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *