मुंबई (महाराष्ट्र):- टेक कंपनियों के भारी मुनाफे पर सवाल उठने लगे हैं। मशहूर इन्वेस्टर माइकल बरी ने इन कंपनियों के खातों में हेरफेर का इशारा किया है। उन्होंने कहा है कि कंपनियां अपने सर्वर और चिप्स जैसे एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के जीवनकाल को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रही हैं। इससे उनके खर्च कम दिख रहे हैं और मुनाफा ज्यादा। यह सब अकाउंटिंग के तरीके बदलकर किया जा रहा है।
माइकल बरी ने 2008 के हाउसिंग क्रैश की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बात का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मेटा और अल्फाबेट जैसी कंपनियां अपने सर्वर, चिप्स और एआई से जुड़े दूसरे सामानों के इस्तेमाल की अवधि बढ़ा रही हैं। पहले वे इन चीजों को कम सालों के लिए इस्तेमाल में लाती थीं। लेकिन, अब उन्होंने यह अवधि बढ़ा दी है। इसका सीधा मतलब है कि इन चीजों पर होने वाले खर्च को धीरे-धीरे दिखाया जा रहा है। इससे कंपनियों का मुनाफा कागजों पर तो बढ़ जाता है। लेकिन, असल में उनके पास आने वाले पैसे (कैश फ्लो) में कोई बढ़ोतरी नहीं होती।
निवेशक की बड़ी चेतावनी
बरी ने चेतावनी दी है, ‘ये अकाउंटिंग बदलाव गैरकानूनी नहीं हैं। लेकिन, ये असल खर्चों को छुपाते हैं।’ उन्होंने हाल ही में अपने फंड का एसईसी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) से रजिस्ट्रेशन रद्द करवा लिया है। इससे उनकी बातों को और भी गंभीरता से लिया जा रहा है।