Workplace safer नई दिल्ली:- भारत में मधुमेह के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और यह अनुमान है कि देश में लगभग 7.7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। मधुमेह से पीड़ित लोगों को अपने कार्यस्थल पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे कि रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना, दवाओं का सेवन करना और कार्य के दौरान स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना। इसलिए यह आवश्यक है कि नियोक्ता अपने कार्यस्थल को मधुमेह से पीड़ित कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और उत्पादक बनाएं।
नियोक्ता क्या कर सकते हैं?
1. मधुमेह के बारे में जागरूकता बढ़ाएं: नियोक्ता अपने कर्मचारियों को मधुमेह के बारे में शिक्षित कर सकते हैं और उन्हें इसके लक्षणों और प्रबंधन के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
2. स्वस्थ आहार और पेय की व्यवस्था करें: नियोक्ता अपने कार्यस्थल पर स्वस्थ आहार और पेय की व्यवस्था कर सकते हैं जैसे कि फल, सब्जियां, और शुगर-फ्री पेय।
3.व्यायाम की सुविधा प्रदान करें: नियोक्ता अपने कर्मचारियों को व्यायाम करने के लिए सुविधा प्रदान कर सकते हैं जैसे कि जिम या योग कक्षा।
4. मधुमेह के लिए अनुकूल कार्य व्यवस्था: नियोक्ता मधुमेह से पीड़ित कर्मचारियों के लिए अनुकूल कार्य व्यवस्था कर सकते हैं जैसे कि लवचिक कार्य समय, आराम के लिए समय, और शौचालय तक आसान पहुंच।
5. मधुमेह प्रबंधन के लिए समर्थन: नियोक्ता मधुमेह से पीड़ित कर्मचारियों को मधुमेह प्रबंधन के लिए समर्थन प्रदान कर सकते हैं जैसे कि मधुमेह नर्स या डायबेटिक एजुकेटर की सेवाएं।
6. मधुमेह के बारे में नीति बनाएं: नियोक्ता मधुमेह के बारे में एक नीति बना सकते हैं जो कर्मचारियों को मधुमेह के बारे में जानकारी देती है और उन्हें समर्थन प्रदान करती है ।