नई दिल्ली :- दशहरा और दिवाली की रौनक खत्म होने के बाद जब लोग स्कूल कॉलेज और दफ्तरों में दोबारा लौट आए तब अब सभी को अगले महत्वपूर्ण अवकाश का इंतजार है। यह दिन केवल छुट्टी का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का संदेश लेकर आता है। चौबीस नवंबर दो हजार पच्चीस को पूरे देश में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया जाएगा। यह दिन त्याग साहस और धार्मिक स्वतंत्रता के आदर्शों को स्मरण करने का अवसर है।
गुरु तेग बहादुर जी को हिंद दी चादर के रूप में सम्मानित किया जाता है क्योंकि उन्होंने मानव अधिकार और धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका ये बलिदान किसी एक समुदाय के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा है। इस दिन देश के विभिन्न क्षेत्रों में कीर्तन कथा और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है ताकि लोगों को उनके महान आदर्शों से जोड़ा जा सके।
विद्यालय कॉलेज और विभिन्न संस्थानों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। छात्रों को गुरु तेग बहादुर जी के जीवन संदेश और उनके अद्भुत साहस से परिचित कराया जाता है। कई स्थानों पर निबंध प्रतियोगिताएं भाषण सत्र और सेवा कार्यक्रम चलते हैं जिनका उद्देश्य यह समझाना होता है कि सत्य और नैतिकता का मार्ग ही समाज को मजबूत बनाता है।
इस दिन गुरुद्वारों में विशेष अरदास होती है और लंगर सेवा के माध्यम से सभी को समान भाव से भोजन कराया जाता है। यह परंपरा गुरु परंपरा की करुणा और सेवा भावना का प्रतीक है।
गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस हमें यह संदेश देता है कि सत्य मानवता और धर्म की रक्षा सबसे बड़ा कर्तव्य है। कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहना ही मनुष्य को महान बनाता है। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान आज भी उतना ही प्रासंगिक है और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा दिखाता है।