नई दिल्ली :- दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट ने जांच एजेंसियों को एक ऐसे गुप्त नेटवर्क तक पहुंचा दिया है जिसने सुरक्षा व्यवस्था को नई चुनौती दे दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आतंकी तत्व लंबे समय से एन्क्रिप्टेड चैट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए एक दूसरे से जुड़े हुए थे। इस नेटवर्क में सक्रिय सदस्यों के बीच केवल तय कोड शब्दों के माध्यम से बातचीत होती थी जिससे किसी भी संदेश की निगरानी मुश्किल हो जाती थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार इस मॉड्यूल के तार कई राज्यों से जुड़े मिले हैं। कुछ संदिग्ध युवकों को वित्तीय सहायता नियमित रूप से प्राप्त हो रही थी और यह रकम कई छोटे डिजिटल वॉलेट्स में बांटकर भेजी जाती थी ताकि किसी भी ट्रांजेक्शन पर संदेह न हो। इसके अलावा हथियारों को इकट्ठा करने और उनके सुरक्षित परिवहन के लिए भी बेहद योजनाबद्ध तरीके अपनाए गए थे। कई बार वाहन बदलकर और नकली पहचान का उपयोग करके इन गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था।
खुफिया सूत्रों का मानना है कि मॉड्यूल के संचालक राजधानी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। लाल किले के पास हुआ विस्फोट उनके नेटवर्क की सक्रियता का एक संकेत माना जा रहा है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि देश के कुछ हिस्सों में युवकों को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर धीरे धीरे इस नेटवर्क में शामिल किया गया था। इन युवकों का इस्तेमाल निगरानी टोही और संसाधनों के संचलन जैसी गतिविधियों में किया जाता था।
सुरक्षा एजेंसियां अभी इस पूरे मॉड्यूल की संरचना को समझने में लगी हैं। डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है और कई एन्क्रिप्टेड चैट को डीक्रिप्ट करने पर काम चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक विस्फोट का नहीं बल्कि एक गहरी साजिश का संकेत है। आने वाले दिनों में और कई अहम खुलासे होने की संभावना है।