नई दिल्ली :- तालिबान प्रशासन की नई नीति ने भारत और अफगानिस्तान के बीच हवाई व्यापार के रास्ते को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम रखा है। अरियाना अफगान एयरलाइंस ने दिल्ली काबुल कार्गो रेट में ऐतिहासिक कमी लागू कर दी है। इस कदम से दोनों देशों के व्यापारियों को लागत में भारी राहत मिली है और व्यापार का पुराना प्रवाह फिर से तेज होने की उम्मीद जगी है।
अफगानिस्तान में लंबे समय से जमीनी रूट के बंद होने के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। पाकिस्तान के जरिए ट्रांजिट बंद होने से अफगानिस्तान की बिजनेस कम्युनिटी को लगातार नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे माहौल में काबुल प्रशासन ने हवाई मार्ग को मुख्य व्यापारिक चैनल बनाने का फैसला किया है ताकि भारतीय मार्केट तक सामान पहुंचाने में किसी तरह की परेशानी न आए।
अफगानिस्तान के आर्थिक उपमंत्री ने अपने व्यापारिक समुदाय को सलाह दी है कि वे पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म करें और भारत तथा ईरान जैसे नए विकल्प अपनाएं। इसी निर्णय के तहत दिल्ली रूट को प्राथमिकता दी गई है और कार्गो दरें इतनी कम कर दी गई हैं कि छोटे और मध्यम व्यापारी भी आसानी से निर्यात और आयात कर सकेंगे।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि व्यापार की लागत आधी से भी कम हो गई है जिससे अफगान फल सूखे मेवे दवाएं और अन्य सामान अब तेजी से और किफायती दरों पर भारत पहुंच सकेंगे। साथ ही भारत से दवाएं मशीनरी और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई भी सुचारू रूप से जारी रह सकेगी।
इस कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में नई ऊर्जा आई है। हवाई व्यापार मार्ग न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि समय भी बचाता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में दिल्ली काबुल एयर कॉरिडोर क्षेत्रीय व्यापार का मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगा।