Maoist movement नई दिल्ली:– माओवादी आंदोलन को एक बड़ा झटका देते हुए शीर्ष माओवादी नेता माडवी हिडमा की मौत एक मुठभेड़ में हो गई है। यह मुठभेड़ आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हुई जहां हिडमा और उसके पांच अन्य साथियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया।
हिडमा जो माओवादी पार्टी की केंद्रीय समिति का सदस्य था पिछले दो दशकों से सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। उसने कई बड़े हमलों की योजना बनाई थी जिनमें 2010 का दंतेवाड़ा हमला भी शामिल है जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे हिडमा की मौत को माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वह एक कुशल रणनीतिकार और एक अनुभवी लड़ाका था। उसकी मौत से माओवादी आंदोलन की कमर तोड़ दी गई है और अब यह आंदोलन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।
माडवी हिडमा का जीवन और करियर
माडवी हिडमा का जन्म 1981 में सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था। वह एक आदिवासी परिवार से आया था और उसने अपनी शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। हिडमा ने 1991 में माओवादी पार्टी में शामिल होने के लिए अपने गांव छोड़ दिया था और जल्द ही वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में पहुंच गया। हिडमा की मौत के बाद, माओवादी पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने नेता की मौत का बदला लेगी। हालांकि सुरक्षा बलों का कहना है कि हिडमा की मौत के बाद माओवादी आंदोलन को बड़ा झटका लगा है और अब यह आंदोलन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।