पुणे :- पुणे के चर्चित भूमि विवाद मामले में नया मोड़ सामने आया है जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी से जुड़े इस सौदे की जांच पिछले कई महीनों से सुर्खियों में थी। अब जांच समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि पार्थ का नाम किसी भी अनियमित दस्तावेज में नहीं मिला है। इस निष्कर्ष ने न केवल उन्हें बड़ी राहत दी है बल्कि पूरे मामले की दिशा भी बदल दी है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार सौदे से जुड़े कागजातों में अनियमितताएं जरूर पाई गई हैं लेकिन इन अनियमितताओं के लिए तीन अन्य व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें सब रजिस्ट्रार भी शामिल है जिन पर दस्तावेजों की प्रक्रिया के दौरान नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दस्तावेज तैयार करने और सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है जिसके चलते यह विवाद खड़ा हुआ।
पार्थ पवार इस मामले में शुरू से अपनी बेगुनाही का दावा करते आए हैं और उनका कहना है कि कंपनी से जुड़े लेनदेन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। अब रिपोर्ट सामने आने के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा तेज हो गई है कि इस विवाद को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे थे वे अब टिक नहीं पाएंगे।
इस मामले ने महाराष्ट्र की सियासत में कई सवाल खड़े किए थे लेकिन जांच समिति के निष्कर्ष ने फिलहाल तनाव कम कर दिया है। आगे की कार्रवाई सब रजिस्ट्रार और अन्य दोषियों पर केंद्रित होने की संभावना है। इसके साथ ही प्रशासन अब यह देखेगा कि भविष्य में ऐसी चूकें दोबारा न हों और भूमि सौदों की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।