Study warns : भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस का बढ़ता खतरा

Study warns नई दिल्ली:- एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भारत में 83% से अधिक मरीज एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया से संक्रमित हैं जो देश के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। यह अध्ययन द लैंसेट ईक्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है और इसमें भारत, इटली, अमेरिका और नीदरलैंड के 1,200 से अधिक मरीजों का विश्लेषण किया गया है।

एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस का मतलब

एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या पैरासाइट एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं जिससे संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाता है।

भारत में एएमआर की स्थिति

भारत में एएमआर की स्थिति बहुत गंभीर है। यहां 70.2% मरीज ईएसबीएल-प्रोड्यूसिंग बैक्टीरिया से संक्रमित हैं जो आम एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हैं। इसके अलावा 23.5% मरीज कार्बापेनम-प्रतिरोधी बैक्टीरिया से संक्रमित हैं जो लास्ट-रिसॉर्ट एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हैं।

एएमआर के कारण

एएमआर के कई कारण हैं जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:

– अनावश्यक एंटीबायोटिक उपयोग: लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स लेते हैं।

– अधूरी उपचार: लोग अक्सर एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स नहीं लेते हैं।

– असुरक्षित खाद्य और जल: असुरक्षित खाद्य और जल में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया हो सकते हैं।

– खराब स्वच्छता: खराब स्वच्छता के कारण एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया फैल सकते हैं ।

एएमआर को रोकने के उपाय

एएमआर को रोकने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं:

– एंटीबायोटिक्स का सही उपयोग: एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर करें।

– पूर्ण उपचार: एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स लें।

– सुरक्षित खाद्य और जल: सुरक्षित खाद्य और जल का सेवन करें।

– स्वच्छता: अच्छी स्वच्छता का पालन करें।

– वैक्सीनेशन: वैक्सीनेशन करवाएं।

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