लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दुनिया आज गहरे दुख में है क्योंकि सपा विधायक सुधाकर सिंह का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनके जाने से प्रदेश की सार्वजनिक जीवन से जुड़ी एक गरिमामयी आवाज हमेशा के लिए मौन हो गई। बताया जा रहा है कि वह मुख्तार अंसारी के बेटे के विवाह समारोह से लौटते समय अचानक अस्वस्थ हो गए और स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया परंतु जीवन रक्षा प्रयास सफल नहीं हो पाए।
सुधाकर सिंह अपनी सादगी कर्तव्यनिष्ठा और जनता से जुड़े रहने की वजह से लोकप्रिय चेहरा थे। उनका राजनीतिक सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा और उन्होंने कठिन हालात में भी अपनी पहचान दृढ़ता से कायम रखी। उपचुनाव में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को हराकर उन्होंने प्रदेश राजनीति में एक नया संदेश दिया था जिससे यह साफ हुआ था कि जनता उनके काम और उनके स्वभाव को कितना पसंद करती है।
उनके निधन से उनके क्षेत्र के लोगों में भारी निराशा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह हमेशा जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते थे और किसी भी जरूरतमंद को निराश नहीं लौटाते थे। उनके नेतृत्व ने क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी और कई योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुधाकर सिंह का जाना सपा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी क्षति है। वह विपक्ष के एक शांत सोच वाले लेकिन दृढ़ नेता थे। उनके व्यवहार में विनम्रता थी और उनकी वाणी में हमेशा संयम झलकता था।
सुधाकर सिंह की राजनीतिक यात्रा भले ही आज समाप्त हो गई हो पर उनका कार्यक्षेत्र के प्रति समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनके योगदान की छाप आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में महसूस की जाती रहेगी और उनके आदर्श नई पीढ़ी को प्रेरणा देते रहेंगे।