नई दिल्ली :- नई शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2026 से दसवीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी और इसी निर्णय को लेकर छात्रों अभिभावकों और शिक्षकों के बीच कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई थीं। इन सभी सवालों को अब सीबीएसई के चेयरमैन ने स्पष्ट किया है। चेयरमैन ने बताया कि इस नए सिस्टम का उद्देश्य छात्रों पर से दबाव कम करना है ताकि वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें और सीखने की प्रक्रिया को तनाव मुक्त बना सकें।
चेयरमैन के अनुसार यह फैसला तुरंत या जल्दबाजी में नहीं लिया गया बल्कि इस पर कई चरणों में विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सबसे पहले सैमेस्टर सिस्टम पर विचार किया गया जिससे पाठ्यक्रम कम हो सकता था लेकिन इस तरीके में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आतीं क्योंकि अध्यापकों पर अतिरिक्त मूल्यांकन का बोझ बढ़ता और छात्रों की निरंतर मूल्यांकन प्रक्रिया भी कठिन हो जाती। इसलिए इस विकल्प को अंतिम रूप नहीं दिया गया।
इसके बाद छात्रों के तनाव को कम करने के उद्देश्य से साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। चेयरमैन ने कहा कि इस व्यवस्था में छात्रों को अधिक मौके मिलेंगे। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में अपनी अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाता है तो उसे दूसरी बार पूरी तैयारी के साथ बेहतर परिणाम पाने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और एक ही परीक्षा पर पूरा भविष्य निर्भर होने जैसी स्थिति नहीं रहेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों परीक्षाओं में से बेहतर स्कोर को ही अंतिम माना जाएगा जिससे किसी भी छात्र को नुकसान का डर नहीं रहेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रतियोगी माहौल को संतुलित बनाना और छात्रों को सीखने की प्रक्रिया का आनंद दिलाना है। यह बदलाव शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र केंद्रित बनाकर आने वाले समय में उनके समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।