नई दिल्ली :- हिंदी संगीत जगत के सुर सम्राट किशोर कुमार अपनी आवाज के जादू से हर भाव को जीवंत कर देते थे। वे कभी केवल गायक नहीं थे बल्कि हर शख्स की धड़कनों से जुड़े एक कलाकार थे। उनकी आवाज में ऐसी कशिश थी कि खुशी हो या दर्द हर एहसास सीधे दिल में उतर जाता था। अपने करियर में उन्होंने हजारों गाने गाए लेकिन कुछ गीत ऐसे भी थे जिनमें उन्होंने अपने दिल का सबसे गहरा दर्द उड़ेल दिया। मिथुन चक्रवर्ती की एक फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया गया एक गीत इन्हीं में से एक था जिसने उन्हें रिकॉर्डिंग के दौरान रुला दिया।
स्टूडियो में मौजूद लोग बताते हैं कि जैसे ही गीत की धुन शुरू हुई किशोर दा की आंखें नम होने लगीं। हर स्टेज पर उन्होंने अपनी भावनाओं को काबू में रखने की कोशिश की लेकिन सुर के साथ जुड़ी यादें इतनी गहरी थीं कि वे खुद को रोक नहीं सके। उनकी आवाज में भरा दर्द सुनकर वहां मौजूद टेक्नीशियन भी स्तब्ध रह गए। उस क्षण में लगा जैसे गीत केवल एक रिकॉर्डिंग नहीं है बल्कि उनका अपना जीवन खुलकर सामने आ रहा है।
किशोर कुमार अपनी निजी जिंदगी में कई उतार चढ़ाव से गुजरे थे और यही जीवन अनुभव उनके गीतों में एक अनोखी गहराई भर देता था। जब वे इस गीत को गा रहे थे तो उनके भीतर का दर्द शब्दों के साथ एकाकार होकर बहने लगा। उनकी भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि हर पंक्ति सुनने वाले को भीतर तक हिला देती है।
यह गीत केवल सुर और शब्दों का मेल नहीं था बल्कि एक संवेदनशील आत्मा की पुकार था। आज भी जब यह गीत सुनाई देता है तो लोगों की आंखें भर आती हैं। किशोर दा ने एक बार फिर साबित कर दिया था कि सच्ची कला वही है जो दिल से निकले और सीधे दिल तक पहुंचे। उनकी रूहानी आवाज सालों बाद भी श्रोताओं को उसी गहराई से छूती है और यही उनकी अमरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।