Pharmacogenomics नई दिल्ली:- फार्माकोजेनोमिक्स एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो व्यक्तिगत चिकित्सा के लिए जीन की जानकारी का उपयोग करता है। यह तकनीक डॉक्टरों को यह तय करने में मदद करती है कि कौन सी दवा और कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए जिससे दवा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है और दुष्प्रभाव कम होते हैं।
कैसे काम करता है फार्माकोजेनोमिक्स?
फार्माकोजेनोमिक्स में जीन की जानकारी का उपयोग करके यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति की जीन संरचना दवा के प्रति उनकी प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करती है। यह जानकारी डॉक्टरों को दवा की खुराक और प्रकार को व्यक्तिगत रूप से तय करने में मदद करती है।
फार्माकोजेनोमिक्स के लाभ
– दवा की प्रभावशीलता बढ़ाना: फार्माकोजेनोमिक्स डॉक्टरों को यह तय करने में मदद करता है कि कौन सी दवा सबसे अधिक प्रभावी होगी।
– दुष्प्रभाव कम करना: यह तकनीक दवा के दुष्प्रभावों को कम करने में मदद करती है।
– व्यक्तिगत चिकित्सा: फार्माकोजेनोमिक्स व्यक्तिगत चिकित्सा को संभव बनाता है जिससे प्रत्येक व्यक्ति को उनकी जीन संरचना के अनुसार दवा दी जा सकती है।
– चिकित्सा खर्च कम करना: यह तकनीक अनावश्यक दवाओं और दुष्प्रभावों के इलाज पर खर्च होने वाले पैसे को बचाने में मदद करती है ।
फार्माकोजेनोमिक्स के अनुप्रयोग
– कैंसर उपचार: फार्माकोजेनोमिक्स कैंसर के उपचार में व्यक्तिगत चिकित्सा को संभव बनाता है।
– मनोरोग: यह तकनीक मनोरोग में दवा की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद करती है।
– हृदय रोग: फार्माकोजेनोमिक्स हृदय रोग के उपचार में व्यक्तिगत चिकित्सा को संभव बनाता है।
फार्माकोजेनोमिक्स का भविष्य
फार्माकोजेनोमिक्स एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो व्यक्तिगत चिकित्सा के भविष्य को आकार दे रहा है। जैसे-जैसे जीन की जानकारी का उपयोग बढ़ेगा यह तकनीक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी ।