Tata motors मुंबई:- टाटा ट्रस्ट्स के न्यासी डेरियस खंबाटा ने ट्रस्ट के बोर्ड को लिखे एक पत्र में कहा है कि 11 सितंबर, 2025 को हुई बैठक में ‘कू’ या नियंत्रण हासिल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया था। खंबाटा ने इसे “बेतुका” बताया और कहा कि उनकी और अन्य न्यासियों की एकमात्र चिंता टाटा सन्स के बोर्ड में ट्रस्ट के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना था। खंबाटा ने अपने पत्र में कहा कि टाटा सन्स के बोर्ड में ट्रस्ट के प्रतिनिधित्व को लेकर उनकी और अन्य न्यासियों की दृष्टिकोण में अंतर था, लेकिन इसका उद्देश्य किसी को हटाना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह खुद दो बार रतन टाटा की ओर से टाटा सन्स के बोर्ड में नामांकन के प्रस्ताव को ठुकरा चुके है।
खंबाटा ने ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा के नेतृत्व में एकजुट रहने की अपील की और कहा कि ट्रस्ट के हितों की रक्षा के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वह और अन्य न्यासी ट्रस्ट के हितों के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी तरह के व्यक्तिगत हित को प्राथमिकता नहीं दे रहे है। इस बीच टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य न्यासी मेहली मिस्त्री ने हाल ही में ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद यह विवाद सामने आया है। मिस्त्री के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के बोर्ड में बदलाव हुए हैं और नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को एसडीटीटी बोर्ड में शामिल किया गया है।