निठारी कांड भारतीय अपराध इतिहास का वह काला अध्याय है जिसे सुनकर आज भी रूह कांप उठती है। इस घटना में जिस तरह बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाया गया वह किसी भी समाज और इंसानियत के लिए गहरा आघात था। नोएडा के निठारी गांव में सामने आए इस हत्याकांड में कई मासूमों के कंकाल नाले से बरामद हुए और पूरे देश में दहशत और गुस्से की लहर दौड़ गई। बीस साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह घटना अब भी लोगों के मन में भय और दर्द का कारण बनी हुई है।
इस कांड के उजागर होने के बाद पुलिस ने कई चौंकाने वाले तथ्य बताए जिनसे पता चला कि यह अपराध न केवल योजनाबद्ध था बल्कि अत्यंत क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया था। स्थानीय लोगों ने लंबे समय तक बच्चों के गायब होने की शिकायतें दर्ज कराई थीं लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके क्षेत्र में इतना भयावह खेल खेला जा रहा है। जब सच्चाई सामने आई तो हर तरफ आक्रोश फैल गया और पीड़ित परिवारों का दर्द किसी भी इंसान का हृदय पिघला देने के लिए काफी था।
वर्षों बीत जाने के बाद भी यह मामला न्याय व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक कड़ा सबक बन चुका है। यह हमें याद दिलाता है कि अपराध चाहे कितना भी छिपा क्यों न हो उसकी सच्चाई एक दिन सामने आ ही जाती है। निठारी कांड ने यह भी दर्शाया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितनी अधिक जिम्मेदारी की जरूरत है और समाज को सतर्क रहना कितना आवश्यक है।
आज इस घटना का नाम लेते ही मन में भय के साथ साथ उन परिवारों के प्रति सहानुभूति भी जागती है जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खो दिया। निठारी कांड सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसे भुलाना असंभव है और जिसकी यादें हमेशा समाज को चौकन्ना रहने की सीख देती रहेंगी।