इस्लामाबाद (पाकिस्तान):- पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक बार फिर वही पुराना खेल शुरू कर दिया है जिसमें वह खुद को मासूम और पीड़ित दिखाने की कोशिश करता है। इस बार उसने एक भारतीय पायलट की शहादत पर दिखावटी शोक जताकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। यह कदम केवल सहानुभूति बटोरने की रणनीति है क्योंकि वास्तविकता में पाकिस्तान की नीतियां और उसके समर्थन वाले तंत्र अक्सर क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुंचाने वाले रहे हैं। भारत ने हमेशा आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों और सीमाई सुरक्षा के दौरान अनेक वीर सैनिक और पायलट खोए हैं और उनके बलिदान को सम्मान के साथ याद किया जाता है। ऐसे में पाकिस्तान का यह अचानक बदला हुआ रवैया उसकी राजनीतिक मंशा को और अधिक उजागर करता है।
भारतीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के बयान पाकिस्तान के दोहरे चरित्र का हिस्सा हैं। एक तरफ वह अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने शांतिप्रिय छवि पेश करने का प्रयास करता है और दूसरी तरफ उसके भीतर ऐसे समूह पनपते रहते हैं जो अस्थिरता को हवा देते हैं। भारतीय पायलट की शहादत पर पाकिस्तानी प्रतिक्रिया को विशेषज्ञ केवल एक प्रचार अभियान का हिस्सा मानते हैं जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपने प्रति सहानुभूति उत्पन्न करना है।
भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि शांति संवाद और विश्वास तभी संभव है जब सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए। भारत के वीर सैनिक अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देते हैं और उनका सम्मान राजनीति की किसी चाल में नहीं बांधा जा सकता।
पाकिस्तान द्वारा किया गया यह दिखावटी कदम दुनिया की आंखों में धूल झोंकने जैसा है क्योंकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब धीरे धीरे समझने लगा है कि शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण है वास्तविक आचरण और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता। इसलिए भारत दृढ़ता से आगे बढ़ते हुए अपने शहीदों के सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा के संकल्प को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा।