आगरा (उत्तर प्रदेश):- आगरा में सामने आई एक बैंकिंग चूक ने एक सामान्य परिवार के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। राजस्थान के कोटा जिले के श्रीनाथ पुरम नीलांचल अपार्टमेंट में रहने वाले रोहित जौहरी और उनकी पत्नी शिखा जौहरी ने वर्ष दो हजार दस में अपनी जीवन भर की बचत सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिकंदरा शाखा में तीन फिक्स्ड डिपॉजिट के माध्यम से कुल ग्यारह लाख रुपये जमा किए थे। उन्हें यह विश्वास था कि बैंकिंग प्रणाली उनके धन को सुरक्षित रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय पर सहायता मिलेगी।
कई वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा और दम्पति को अपनी जमा राशि के सुरक्षित होने का भरोसा बना रहा। लेकिन हाल ही में जब उन्होंने अपनी एफडी राशि के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाही तो उन्हें पता चला कि रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां मौजूद हैं। खाते का ब्योरा स्पष्ट नहीं था और जमा राशि की स्थिति संदिग्ध दिखाई दे रही थी। यह सुनकर परिवार का विश्वास टूट गया क्योंकि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अपनी मेहनत की कमाई बैंक में सौंपी थी।
इस मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठने लगे हैं। ग्राहकों का कहना है कि यदि व्यक्ति अपनी बचत का संरक्षण भी सुरक्षित महसूस न कर सके तो बैंकिंग ढांचे की विश्वसनीयता कैसे कायम रह सकती है। बैंक प्रशासन ने जांच प्रारंभ कर दी है और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलती किस स्तर पर हुई।
इस घटना ने कई लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि अपनी जमा राशि की नियमित रूप से जांच और सत्यापन करना कितना महत्वपूर्ण है। एक छोटी चूक बड़े संकट का कारण बन सकती है। यह प्रकरण न केवल एक परिवार की समस्या है बल्कि बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता का भी संकेत है ताकि हर नागरिक अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित महसूस कर सके।