नई दिल्ली :- दुबई एयर शो का एक साधारण अभ्यास सत्र कुछ ही क्षणों में राष्ट्रीय शोक में बदल गया जब भारतीय वायुसेना का तेज और अत्याधुनिक हल्का लड़ाकू विमान तेजस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह वही विमान था जिसे दुनिया भारत की तकनीकी क्षमता और अद्भुत एरोबेटिक कौशल का प्रतीक मानती है। मंच तैयार था दर्शकों की आंखें आसमान पर टिकी थीं और हर किसी को भरोसा था कि यह उड़ान शानदार प्रदर्शन के रूप में दर्ज होगी लेकिन नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।
स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल इस अभ्यास उड़ान का हिस्सा थे और हर manoeuvre को पूरी निष्ठा से अंजाम दे रहे थे। तेजस की ऊंची गूंज पूरे मैदान में ऊर्जा भर रही थी और भारत की प्रतिष्ठा एक बार फिर दुनिया के सामने चमकने वाली थी। उसी दौरान एक अचानक आई तकनीकी समस्या ने पूरे नियंत्रण को प्रभावित कर दिया। पलक झपकते ही विमान नीचे आने लगा और कुछ ही सेकंड में तेज धमाका हुआ जिसने पूरे क्षेत्र में सन्नाटा बिखेर दिया। यह हादसा किसी एक विमान या एक पायलट का नुकसान नहीं था बल्कि यह देश के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
नमांश स्याल सिर्फ एक अधिकारी नहीं थे बल्कि अपने परिवार का सहारा अपने गांव का गौरव और वायुसेना की शान थे। कांगड़ा जिले का छोटा सा इलाका उनके सपनों को आसमान देता था और वही आसमान आखिरकार उनकी अंतिम सीमा बन गया। उनके माता पिता और बहन के लिए यह वह सदमा है जिसे समय भी पूरी तरह भर नहीं पाएगा। सबसे हृदयविदारक क्षण उनकी पत्नी और उनकी सात वर्ष की बेटी का है। दोनों ही उनके जीवन का केंद्र थीं और अब वही जीवन एक गहरी खालीपन से घिर गया है।
इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि वर्दी पहनने वाले योद्धा हर दिन खतरे से खेलते हुए देश की रक्षा करते हैं। उनका हर उड़ान भरना समर्पण का प्रतीक है और उनका हर कदम राष्ट्र की ताकत का आधार है। स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल का बलिदान सदा अमर रहेगा और उनका नाम बहादुरी अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक स्तम्भ बनकर हमेशा याद किया जाएगा।