नई दिल्ली :- एक साधारण सा पल जब किसी बड़े व्यक्तित्व के मुख से निकले सहज शब्द पूरे परिसर का माहौल बदल देते हैं तब वह घटना यादगार बन जाती है। ऐसा ही क्षण तब देखने को मिला जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा किए। उनका अंदाज हमेशा की तरह सरल था परंतु संदेश अत्यंत गहरा था। उन्होंने मंच पर आते ही कहा कि वे अपनी उड़ान की चिंता में अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हट सकते। यह वाक्य सुनते ही सभागार में मौजूद हर व्यक्ति प्रभावित हो गया क्योंकि यह एक ऐसे जनसेवक का विचार था जो कार्य को हमेशा प्राथमिकता देता है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि उनका हाल का अतीत इस बात का जीवंत प्रमाण है। इसे सुनते ही पूरा परिसर तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। लोगों ने महसूस किया कि उनका यह हास्य भरा वक्तव्य केवल मजाक नहीं बल्कि एक सच्ची सीख भी है कि जिम्मेदारियां हमेशा किसी भी व्यक्तिगत सुविधा से बड़ी होती हैं। उनकी इस बात में वह संवेदनशीलता भी झलक रही थी जो उन्हें सदैव जनता के प्रति समर्पित रखती है।
कार्यक्रम में उपस्थित युवा छात्रों और आम नागरिकों ने इस क्षण को अपने जीवन की प्रेरणा के रूप में ग्रहण किया। अनेक लोगों ने कहा कि धनखड़ का सादगी पूर्ण व्यवहार उन्हें और भी अधिक सम्माननीय बनाता है। वे न केवल अपने पद की गरिमा रखते हैं बल्कि यह भी दिखाते हैं कि नेतृत्व केवल अधिकार का विषय नहीं बल्कि अनुशासन और समर्पण का प्रतीक भी है।
इस पूरे कार्यक्रम में उनका व्यक्तित्व एक प्रेरणा के रूप में उभर कर सामने आया। उनका संदेश स्पष्ट था कि देश सेवा और कर्तव्य पालन किसी भी अन्य प्राथमिकता से ऊपर होता है। यह क्षण भविष्य में भी लोगों को यह याद दिलाता रहेगा कि एक सच्चा नेता वही है जो चुनौतियों के बीच भी अपने कार्य के प्रति निष्ठावान बना रहे।