पटना (बिहार ):- बिहार में हाल ही में हुए शपथ ग्रहण समारोह के बाद नई सरकार ने कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए कैबिनेट मंत्रियों को अलग अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस प्रक्रिया ने न केवल प्रशासनिक ढांचे को गति दी है बल्कि राजनीतिक हलकों में भी नई चर्चाओं को जन्म दिया है। सबसे बड़ा निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी को नई नेतृत्व क्षमता वाले सम्राट चौधरी को सौंपने का रहा है। पिछले बीस वर्षों में यह पहली बार हुआ है जब सीएम ने यह संवेदनशील विभाग किसी अन्य मंत्री को दिया है। इससे यह संदेश स्पष्ट हुआ है कि सरकार अब बड़े बदलाव और तेज निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
गृह मंत्रालय राज्य की सुरक्षा व्यवस्था कानून व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय का केंद्र माना जाता है। ऐसे में यह जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को मिलना उनके प्रति भरोसे का परिणाम है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से सरकार के भीतर नई रणनीति और शक्ति संतुलन का संकेत मिलता है। इसके साथ ही अन्य प्रमुख विभागों जैसे कृषि उद्योग स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को भी मंत्रियों के अनुभव और क्षमता के अनुसार विभाजित किया गया है।
नए मंत्रियों ने अपने अपने विभागों की दिशा तय करना शुरू कर दिया है और जनता को उम्मीद है कि उनके क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का समाधान तेजी से होगा। राज्य में विकास परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।
नीतीश कुमार का यह निर्णय प्रशासनिक बदलाव के साथ साथ राजनीतिक संदेश भी देता है जिससे स्पष्ट होता है कि वे गठबंधन सरकार को अधिक मजबूत और संतुलित बनाना चाहते हैं। नई जिम्मेदारियों के साथ मंत्रियों के सामने चुनौतियां भी हैं पर जनता उम्मीद कर रही है कि यह नई टीम राज्य के विकास को नई दिशा देगी।