उत्तर प्रदेश में एसआईआर की समय सीमा बढ़ाने की बढ़ी मांग

लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और इसी के बीच समाजवादी पार्टी ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा समय सीमा कई मामलों की सही और विस्तृत जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण एसआईआर से संबंधित कार्यवाही पर असर पड़ रहा है और कई मामले अधूरे रह जाते हैं जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। जांच अधिकारियों के अनुसार समय की कमी के कारण सबूत जुटाने गवाहों के बयान दर्ज करने और मामले की गहराई तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ऐसे में समय सीमा को बढ़ाना ही एक व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है।

 

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईआर की अवधि बढ़ाने से न केवल जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि प्रशासनिक दबाव भी कम होगा। अधिकारियों को कोई भी कार्य जल्दबाजी में पूरा नहीं करना पड़ेगा और इससे जांच अधिक निष्पक्ष और ठोस हो सकेगी। समाजवादी पार्टी का यह भी कहना है कि प्रदेश में बढ़ते मामलों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त समय की जरूरत और भी जरूरी हो गई है। कई बार मामले इतने जटिल होते हैं कि उन्हें समझने और हर पहलू की पुष्टि करने में लंबा समय लग जाता है।

 

जनता के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कई सामाजिक संगठनों ने कहा है कि समय सीमा बढ़ने से आम लोगों को फायदा होगा क्योंकि जांच अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी। उनका कहना है कि किसी भी जांच का मकसद सत्य को सामने लाना होता है और जल्दबाजी में की गई जांच अक्सर सही निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाती। इसलिए यदि सरकार इस मांग पर विचार करती है तो यह कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाएगा।

 

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि समय सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। जनता उम्मीद कर रही है कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी और उचित निर्णय लेगी जिससे जांच प्रणाली अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके।

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