पटना(बिहार):- बिहार के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। हाजीपुर सहित कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता सूचकांक दो सौ से ऊपर दर्ज किया गया है जो स्पष्ट रूप से बेहद खराब श्रेणी में आता है। इस स्तर पर हवा में मौजूद कण मानव शरीर को सीधे प्रभावित करने लगते हैं और इसका असर तुरंत महसूस होने लगता है। लोगों में सांस लेने में परेशानी आंखों में जलन गले में खराश और थकान की शिकायतें बढ़ गई हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह वातावरण बेहद खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि उनका प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है।
स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्थमा ब्रोंकाइटिस और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है जिन्हें प्रदूषण जनित दिक्कतों के कारण उपचार की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्दियों में तापमान गिरने के साथ हवा भारी हो जाती है और प्रदूषित कण जमीन के नजदीक ठहरने लगते हैं जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा वाहनों की बढ़ती संख्या औद्योगिक गतिविधियां और कचरा जलाने जैसी प्रथाएं भी प्रदूषण को नियंत्रित करने में बड़ी बाधा बन रही हैं।
सरकार और प्रशासन की ओर से प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें सड़क की धूल को नियंत्रित करना अवैध रूप से कचरा जलाने पर कार्रवाई करना और वाहनों की जांच को सख्त करना शामिल है पर यह प्रयास अभी पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें मास्क पहनें और घरों में स्वच्छ वायु बनाए रखने का प्रयास करें। पेड़ों की संख्या बढ़ाने और पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने से भी दीर्घकालिक समाधान पाया जा सकता है। समाज के सभी वर्गों की सामूहिक कोशिशों से ही बिहार को प्रदूषण की इस चुनौती से बाहर निकाला जा सकता है।