कर्नाटक की सियासत में बढ़ती उठापटक के बीच भाजपा की सतर्क रणनीति

कर्नाटक :- कांग्रेस में बढ़ रही आंतरिक कलह ने कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। पार्टी के कई नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं जिससे राज्य की सरकार अस्थिरता के घेरे में दिखाई दे रही है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी भी स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है परंतु पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का रुख जिम्मेदार और संयमित दिख रहा है। इसी क्रम में पूर्व मंत्री और विधायक रमेश जिरकिहोली ने बयान दिया है कि भाजपा को किसी भी कीमत पर कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे राज्य में अनावश्यक अशांति पैदा हो सकती है।

 

रमेश जिरकिहोली ने कहा कि विपक्ष का दायित्व जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना है न कि किसी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करना। उन्होंने माना कि कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेद उनकी अपनी जिम्मेदारी है और भाजपा को इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा अपनी मजबूती संगठन निर्माण और जनता के बीच कामों के दम पर दिखाएगी न कि राजनीतिक उलटफेर के सहारे सत्ता में आना चाहेगी।

 

विधानसभा के कई अनुभवी नेता भी मानते हैं कि राज्य की राजनीति पहले ही कई उतार चढ़ाव झेल चुकी है और एक और राजनीतिक संकट जनता के लिए ठीक नहीं होगा। जिरकिहोली का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह खुद कभी कांग्रेस में रह चुके हैं और वहां की आंतरिक संरचना तथा राजनीति को भली भांति जानते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अपने अंतरविरोधों को दूर कर लेती है तो सरकार स्थिर रह सकती है और इससे विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

 

भाजपा के भीतर भी इस बात पर सहमति बन रही है कि अगला चुनाव संगठन के मजबूती अभियान तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों के आधार पर लड़ा जाएगा। पार्टी के नेता लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं और बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आने वाले महीनों में कर्नाटक में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है पर अभी के लिए भाजपा का शांत और संयमित रुख राज्य की राजनीति को एक स्थिर संदेश देता है।

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