नई दिल्ली :- साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन भारतीय टीम पर लगातार बढ़ता दबाव आखिरकार भारी पड़ गया। टीम इंडिया की बल्लेबाजी पूरी तरह से लड़खड़ा गई और पहली पारी में पूरी टीम केवल दो सौ एक रन पर ढेर हो गई। यह प्रदर्शन उन उम्मीदों से काफी दूर रहा जिनके साथ भारतीय समर्थक और टीम प्रबंधन मैदान पर उतरे थे। पिच पर बल्लेबाजी की परिस्थितियां कठिन जरूर थीं पर भारतीय बल्लेबाजों का आत्मविश्वास और तकनीक दोनों ही साउथ अफ्रीकी गेंदबाजी आक्रमण के सामने कमजोर साबित हुए।
साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाया और भारतीय बल्लेबाजों को तेज उछाल और सटीक लाइन लेंथ से परेशान किया। टॉप ऑर्डर ऐतिहासिक रूप से मजबूत माना जाता है पर इस मैच में शुरुआती झटकों ने टीम को गहरे संकट में धकेल दिया। मध्यक्रम भी संघर्ष करता दिखाई दिया और साझेदारियां लंबे समय तक टिक नहीं पाईं। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब टीम फॉलोऑन से बचने के लिए आवश्यक दो सौ उन्यासी रन भी नहीं बना सकी जिससे उनके सामने हार का खतरा और बढ़ गया।
भारतीय ड्रेसिंग रूम में निराशा साफ देखी जा सकती है क्योंकि गेंदबाजों ने मैच को संतुलित बनाए रखने की पूरी कोशिश की थी पर बल्लेबाजी की विफलता ने सारी रणनीतियों को कमजोर कर दिया। कप्तान और कोच दोनों ही अब टीम में आत्मविश्वास वापस लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं क्योंकि आने वाले सत्रों में भारत के लिए संघर्ष और कठिन होने वाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बल्लेबाजों को विदेशी पिचों पर खेलने की तकनीक में और सुधार लाने की जरूरत है ताकि ऐसी स्थितियों में वे अधिक मजबूती से खेल सकें।
अब मैच का रुख पूरी तरह साउथ अफ्रीका की ओर झुक चुका है और भारत के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति है। प्रशंसक हालांकि अभी भी उम्मीद लगाए हुए हैं कि भारतीय टीम दूसरे पारी में बेहतर वापसी की कोशिश करेगी और लड़कर मैच को नए मोड़ पर ले जाएगी। क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है और भारतीय टीम ने कई बार असंभव परिस्थितियों में भी कमाल कर दिखाया है इसलिए मैदान पर हर गेंद एक नया अवसर लेकर आएगी।