मुंबई (महाराष्ट्र):- देश में सोने की ज्वेलरी को गिरवी रखकर लोन लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है और इसका प्रभाव बाजार से लेकर आम परिवारों की आर्थिक योजनाओं तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आर्थिक दबाव महंगाई और आकस्मिक जरूरतों के बढ़ते मामलों के बीच लोग अब अपने सोने को सुरक्षित संपत्ति मानते हुए इसे लोन हासिल करने के लिए उपयोग कर रहे हैं। यह तरीका तेज और सरल होने के कारण मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय होता जा रहा है।
दूसरी ओर शादियों के सीजन के कारण सोने चांदी की मांग में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार चढ़ाव ने भी कीमतों को ऊपर की ओर धकेला है। मंगलवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तीव्र उछाल दर्ज किया गया जहां इसकी दर तीन हजार पांच सौ रुपये बढ़कर एक लाख अट्ठाइस हजार नौ सौ रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गई। यह कीमत कई परिवारों के बजट पर सीधा असर डाल रही है जो विवाह और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे थे।
सोने की कीमतों में तेजी का असर निवेशकों पर भी गहरा पड़ रहा है। निवेशक सोने को आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित विकल्प मानते हैं इसलिए कीमतें बढ़ने के बावजूद इसकी खरीद में कमी देखने को नहीं मिल रही। बल्कि कई लोग इसे अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षा कवच के रूप में शामिल कर रहे हैं। हालांकि उपभोक्ताओं के लिए यह वृद्धि कई बार चिंता का विषय बन जाती है क्योंकि इससे आभूषण खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इसी प्रकार बनी रहीं तो सोने के दाम आगे भी बढ़ोतरी दिखा सकते हैं। वहीं घरेलू स्तर पर गिरवी लोन की मांग भी जारी रहने की सम्भावना है क्योंकि यह तुरंत नकदी उपलब्ध कराने वाला सबसे सरल विकल्प बन चुका है। कुल मिलाकर सोने से जुड़ी ये दोहरी प्रवृत्तियां आने वाले समय में देश की आर्थिक दिशा को काफी हद तक प्रभावित कर सकती हैं।