नई दिल्ली :- भारतीय निवेशक अब केवल घरेलू शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि वे वैश्विक स्तर पर भी अपने निवेश के अवसर बढ़ाना चाहते हैं। बदलते आर्थिक माहौल और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने निवेशकों के सामने नए विकल्प खोले हैं जिनमें विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश भी शामिल है। आज कई भारतीय निवेशक गूगल टेस्ला एनविडिया और मेटा जैसी विश्व प्रसिद्ध कंपनियों में निवेश करने की इच्छा रखते हैं क्योंकि वे इन कंपनियों की मजबूती और उनके तेजी से बढ़ते विस्तार को समझते हैं।
पहले विदेशी बाजारों में निवेश करना कठिन माना जाता था क्योंकि प्रक्रिया जटिल थी और जानकारी सीमित थी। लेकिन अब आधुनिक फिनटेक प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन ब्रोकरेज सेवाएं इस प्रक्रिया को आसान बना रही हैं। निवेशक कुछ सरल चरणों के माध्यम से विदेशी शेयर बाजारों में खाता खोल सकते हैं और अपनी पसंद की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। इससे उन्हें न केवल विविधता मिलती है बल्कि विश्व स्तर पर तेजी से बढ़ रही तकनीकी कंपनियों की प्रगति का हिस्सा बनने का अवसर भी मिलता है।
विदेशी शेयरों में निवेश करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निवेशक घरेलू बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में पूंजी लगा सकते हैं। जब किसी एक बाजार में गिरावट आती है तो दूसरे बाजार में स्थिरता निवेशक को संतुलन प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही तकनीकी नवाचार आधारित वैश्विक कंपनियां लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं जिससे निवेशकों को भविष्य में मजबूत लाभ मिल सकता है।
हालांकि विदेशी निवेश से पहले आवश्यक है कि निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान से समझें। अंतरराष्ट्रीय बाजार कई बार अत्यधिक उतार चढ़ाव दिखाते हैं इसलिए सही जानकारी और विवेचना बहुत महत्वपूर्ण है। फिर भी यह स्पष्ट है कि भारतीय निवेशकों की सोच तेजी से बदल रही है और वे अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनकर अपने पोर्टफोलियो को अधिक मजबूत और व्यापक बनाना चाहते हैं।