नई दिल्ली :- हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार कंसोलिडेटेड लेबर कोड्स ने देश के कार्यस्थलों की संरचना और संचालन में व्यापक परिवर्तन की शुरुआत कर दी है। ये लेबर कोड्स श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत बनाने उद्योगों को लचीला वातावरण देने और आधुनिक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप श्रम कानून व्यवस्था को सरल बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। वर्षों से चली आ रही जटिल श्रम व्यवस्थाएं अब एक नए और सुव्यवस्थित ढांचे में परिवर्तित की जा रही हैं जिससे उद्योगों को कामकाज आसान होगा और श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
इन लेबर कोड्स का असर देश के विभिन्न सेक्टर्स पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा क्योंकि अब कार्यस्थलों में काम के घंटे छुट्टियां वेतन सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा मानकों से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट और संतुलित हो गए हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए कोड्स उत्पादन इकाइयों सर्विस सेक्टर निर्माण क्षेत्र और छोटे व्यवसायों में एक नई कार्य संस्कृति को जन्म देंगे जिसका उद्देश्य विकास और श्रमिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
श्रमिकों की बात करें तो नए कोड्स के तहत सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक हुआ है। कर्मचारियों को ईपीएफ ईएसआई ग्रेच्युटी और बीमा जैसी सुविधाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी। ठेका श्रमिकों के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं ताकि उन्हें कामकाज में पारदर्शिता और सुरक्षा का लाभ मिल सके। वहीं उद्योगों को फ्लेक्सिबिलिटी मिल रही है जिसके माध्यम से वे अपनी उत्पादन जरूरतों के अनुसार कार्यबल का प्रबंधन कर सकेंगे।
इन सुधारों से भारत में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है क्योंकि सरल और पारदर्शी कानून निवेश को प्रोत्साहन देते हैं। विदेशी और घरेलू कंपनियां अब अधिक सहजता से संचालन कर पाएंगी जिससे देश की आर्थिक विकास दर को भी लाभ मिलेगा। इन लेबर कोड्स ने भारत को आधुनिक श्रम प्रणाली की ओर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।