POCSO Act अल्लाहाबाद:- अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि एक हैप्पीली मैरिड कपल को पीओसीएसओ एक्ट के तहत ट्रायल का सामना करने के लिए मजबूर करना “भाग्य की विडंबना” होगी और यह एक “उत्पीड़न का साधन” होगा। यह निर्णय न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने अश्वनी आनंद की याचिका पर दिया जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर पीओसीएसओ एक्ट के तहत दर्ज किए गए मामले को रद्द करने की मांग की थी ।
इस मामले में अश्वनी आनंद ने अपनी पत्नी के साथ शादी की थी लेकिन उसके पिता ने अश्वनी पर पीओसीएसओ एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। हालांकि अश्वनी की पत्नी ने अपने बयान में कहा था कि उसने अपनी मर्जी से घर छोड़ दिया था और अश्वनी के साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं था।अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब एक हैप्पीली मैरिड कपल को पीओसीएसओ एक्ट के तहत ट्रायल का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह एक “उत्पीड़न का साधन” होता है। कोर्ट ने कहा कि न्याय का उद्देश्य समाज के लिए समस्याएं पैदा करना नहीं है बल्कि समाधान खोजना है।