लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश में एक बार फिर इतिहास नए सिरे से लिखे जाने की दिशा में बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताजा घोषणा ने राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई ऊर्जा दी है। लंबे समय से जिस विषय पर चर्चा होती रही वह अब वास्तविक रूप लेता दिखाई दे रहा है। इस फैसले ने न केवल प्रदेश में उत्साह का वातावरण बनाया है बल्कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है। यहां हर जिलों में कोई न कोई ऐतिहासिक घटना किसी महापुरुष की स्मृति या किसी प्राचीन परंपरा की छाप आज भी जीवित है। उनका मानना है कि यदि इन विरासतों को सही पहचान मिले और उन्हें राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण से जोड़ा जाए तो यह प्रदेश को नई दिशा दे सकता है। सरकार का उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढ़ियों को पता चले कि इस भूमि ने क्या योगदान दिया है और इसकी संस्कृति कितनी समृद्ध रही है।
इस घोषणा के बाद राज्य में ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण विकास और प्रचार पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है। कई स्थान आज भी अपनी महिमा के अनुरूप पहचान नहीं पा सके हैं। उन्हें पुनर्जीवित करने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को नए मंच मिलेंगे और कला संगीत साहित्य तथा लोक परंपराओं को राज्य स्तर पर सम्मानित स्थान प्राप्त होगा।
लोगों का कहना है कि यह कदम सिर्फ एक नीति नहीं बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने जैसा है। उत्तर प्रदेश वह भूमि है जहां इतिहास हर कदम पर महसूस होता है। यदि सरकार के प्रयास इसी प्रकार आगे बढ़ते रहे तो यह प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में और अधिक सशक्त रूप से उभर सकता है।