नई दिल्ली :- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली शनिवार 29 नवंबर की सुबह एक बार फिर घने प्रदूषण की परत में ढकी हुई दिखाई दी। शहर की हवा इतनी खराब हो गई कि एयर क्वालिटी इंडेक्स तीन सौ पचास के पार पहुंच गया जो बहुत खराब श्रेणी में माना जाता है। सुबह के समय धुंध और धुएं का मिश्रण इतना गाढ़ा था कि कई इलाकों में सौ मीटर आगे तक दृश्यता कम हो गई। कार्यालयों और स्कूलों के लिए निकलने वाले लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ए क्यू आई के इस स्तर पर हवा में मौजूद कण सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। अस्थमा के मरीज बुजुर्ग और छोटे बच्चों पर इसका प्रभाव और भी अधिक पड़ता है। कई अस्पतालों ने सुबह से ही सांस संबंधी शिकायतों के बढ़ने की जानकारी दी। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग सुबह की वॉक से बचें और आवश्यकता पड़ने पर ही बाहर निकलें। घर से बाहर जाते समय मास्क का उपयोग करना भी बेहद जरूरी बताया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के अनुसार दिल्ली में हवा खराब होने की मुख्य वजह वाहनों से निकलने वाला धुआं निर्माण से उठने वाली धूल और आसपास के राज्यों में पराली जलने की घटनाएं हैं। हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। कई इलाकों में स्थानीय प्रशासन ने पानी का छिड़काव शुरू कर दिया है और निर्माण स्थलों पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है। इस वर्ष भी स्थिति गंभीर होती जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी समाधान तभी मिलेगा जब सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर दीर्घकालिक नीति लागू करें। फिलहाल शहर के निवासियों को सावधानी बरतने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है।