नई दिल्ली :- भारत के लिए वर्ष 2025 आतंक के खिलाफ निर्णायक और ऐतिहासिक साबित हुआ। पहलगाम हमले के बाद जिस तरह का माहौल पैदा हुआ उसने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया बल्कि सरकार को भी अपनी रणनीति को और मजबूती से लागू करने का अवसर दिया। इस बार भारत ने केवल हमलों का जवाब देने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि एक नई नीति अपनाई जिसे रणनीतिक हलकों में ऑफेंसिव डिफेंस कहा गया। इसका मतलब यह था कि आतंकवाद को जन्म देने वाली गतिविधियों को उनकी जड़ तक पहुंचकर समाप्त करना।
पाकिस्तान की सरजमीं और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय आतंकी ढांचे वर्षों से भारत के लिए चुनौती बने हुए थे। 2025 में भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि आतंकवाद की आग उसके नागरिकों को नुकसान पहुंचाती है तो वह उस आग को वहीं जाकर बुझाएगा जहां से वह उठती है। इस नीति के तहत भारतीय सुरक्षा बलों ने PoK के अंदर कई गहरी और सटीक सर्जिकल स्ट्राइक कीं। इन अभियानों का उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना और उन कमांडरों को खत्म करना था जो लगातार भारत के खिलाफ हमलों की साजिश रचते रहे।
इन ऑपरेशन्स की सबसे खास बात यह रही कि ये अत्यंत गोपनीय और तकनीकी दृष्टि से उन्नत थे। ड्रोन निगरानी उपग्रह समन्वय और स्पेशल फोर्सेज की संयुक्त कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि आतंकियों के पास बचने का कोई रास्ता न बचे। कई आतंकी लॉन्चपैड पूरी तरह तबाह कर दिए गए और जिन कैंपों का इस्तेमाल भारत पर हमलों के लिए होता था वे मलबे में बदल गए। इस रणनीति का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी गहरा रहा क्योंकि इससे यह संदेश गया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार राष्ट्र है।
2025 की यह आक्रामक नीति न केवल सुरक्षा परिदृश्य को मजबूत करती है बल्कि यह भी साबित करती है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में निर्णायक कदम उठाना ही सबसे प्रभावी रास्ता है। भारत ने दुनिया को यह दिखाया कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोच्च है और इसके लिए किसी भी स्तर की दृढ़ कार्रवाई आवश्यक हो तो वह करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।