UP Corruption लखनऊ:- उत्तर प्रदेश में वर्ष 2005-2006 के दौरान हुई आरक्षी नागरिक पुलिस पीएसी और पुलिस रेडियो की भर्तियों में अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित एक विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है जिसमें 25 आईपीएस और 68 पीपीएस अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। समिति ने अपनी जांच में पाया कि कई जिलों में अभ्यर्थियों की जगह अन्य व्यक्तियों द्वारा परीक्षा देने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा चयन बोर्ड के सदस्यों की मिलीभगत से मेडिकल परीक्षण में धांधली की गई और कई अभ्यर्थियों को नियमों के विरुद्ध अंक बढ़ाकर अवैधानिक रूप से चयन सूची में शामिल किया गया।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण संस्थान के जांच अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच अधिकारी ने पहले राज्यपाल महोदय से अभियोजन स्वीकृति नहीं मांगी और बाद में अभियोजन स्वीकृति न मिलने का तर्क देकर न्यायालय को क्लोजर रिपोर्ट भेज दी। न्यायालय ने प्रक्रिया के तहत क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार भी कर ली। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या देश में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए मौजूदा तंत्र पर्याप्त है या फिर इसके लिए नई, स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था की आवश्यकता है। कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले को पुनः खोलने और सीबीआई जांच तत्काल शुरू कराने की मांग भी उठाई है ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को दंड मिल सके।
दस्तक हिंदुस्तान माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह करता है कि इस मामले की कड़ी और निष्पक्ष जांच हो। जिससे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।