लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- जिले में वन भूमि नदी किनारे की जमीन पहाड़ी क्षेत्र और चकमार्ग जैसी गैरकृषि भूमि पर फर्जी तरीके से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर लगभग चालीस करोड़ का नुकसान सरकार को पहुंचाया गया है। इस बड़े घोटाले में अब एक नया आरोप सामने आया है जिसमें एक किसान ने सदर कोतवाली में तैनात एक सिपाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि सिपाही ने उसकी असली जमीन का विवरण बदलकर फसल बीमा कराया और बीमा का भुगतान उसकी पत्नी के खाते में भेज दिया गया।
किसान ने आरोप लगाया है कि उसने किसी भी तरह के बीमे के लिए सहमति नहीं दी थी और न ही उसने अपनी जमीन से जुड़े किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। उसके अनुसार यह पूरा खेल अधिकारियों और स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था जिसमें गैरकृषि भूमि को कृषि भूमि दिखाकर बड़े पैमाने पर बीमा राशि हड़पी गई। किसान का दावा है कि जब उसे बैंक से संदेश प्राप्त हुआ तब उसे इस घोटाले की जानकारी मिली और उसने तुरंत मामले की शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन में खलबली मच गई है और जांच एजेंसियों ने संबंधित अभिलेखों को खंगालना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे मामलों की संभावना जताई जा रही है जिनमें असली किसानों को बिना जानकारी के बीमा योजनाओं में शामिल किया गया और भुगतान किसी अन्य खाते में भेजा गया।
स्थानीय लोग इस घोटाले को जिले के इतिहास की सबसे बड़ी धोखाधड़ी बता रहे हैं और पीड़ित किसानों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को एक बार फिर उजागर करता है।