Parliamentary committee नई दिल्ली:- संसदीय स्थायी वित्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) की पूरी क्षमता को स्थायी और प्रणालीगत चुनौतियां कम कर रही हैं। समिति ने कहा कि आईबीसी ने भारत में दिवालियापन के मामलों के निपटान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसके बावजूद कुछ चुनौतियां हैं जो इसकी प्रभावशीलता को कम कर रही है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आईबीसी के तहत दिवालियापन के मामलों के निपटान में औसतन 713 दिन लगते हैं जो कि निर्धारित 330 दिनों से अधिक है। समिति ने कहा कि यह देरी मुख्य रूप से एनसीएलटी बेंचों की कमी रिक्त पदों और अनावश्यक लिटिगेशन के कारण होती है।
समिति ने आईबीसी में सुधार के लिए कई सिफारिशें की हैं जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
– एनसीएलटी बेंचों की संख्या बढ़ाना: समिति ने एनसीएलटी बेंचों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है ताकि दिवालियापन के मामलों का निपटान तेजी से हो सके।
– रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स की नियुक्ति: समिति ने रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स की नियुक्ति के लिए एक मजबूत प्रणाली बनाने की सिफारिश की है।
– सरकारी दावों का निपटान: समिति ने सरकारी दावों के निपटान के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की सिफारिश की है।
– आईबीसी में संशोधन: समिति ने आईबीसी में संशोधन करने की सिफारिश की है ताकि इसकी प्रभावशीलता बढ़ सके।