संचार साथी ऐप को लेकर सियासी हलचल, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली:- केंद्र सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह असंवैधानिक है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि सरकार इस तरह के कदमों के जरिए नागरिकों की आजादी पर अनावश्यक नियंत्रण स्थापित करना चाहती है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

 

सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में दूरसंचार विभाग ने कहा है कि यह पहल नागरिकों को नकली हैंडसेट और धोखाधड़ी से बचाने के लिए की गई है। विभाग का मानना है कि नए दिशानिर्देशों से आम उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि दूरसंचार संसाधनों का दुरुपयोग किस तरह हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या कदम जरूरी हैं। इसके साथ ही विभाग ने कहा है कि इससे सुरक्षा एजेंसियों को भी संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी में सहायता मिलेगी।

 

संचार साथी ऐप की अवधारणा वर्ष 2023 में एक पोर्टल के रूप में रखी गई थी जिसका उद्देश्य बढ़ते साइबर फ्रॉड और टेलीकॉम स्कैम को रोकना था। इस ऐप की मदद से यूजर अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड की जानकारी प्राप्त कर सकता है और किसी भी अज्ञात नंबर से आने वाले संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट दर्ज कर सकता है। फोन चोरी होने की स्थिति में यह ऐप तुरंत फोन को निष्क्रिय करने की सुविधा भी देता है ताकि डेटा लीक और पहचान की चोरी जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

इस ऐप की कार्यप्रणाली देश के दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के डीएनडी ऐप से काफी मिलती है जिसका उपयोग व्यावसायिक स्पैम और अनचाहे संदेशों को रोकने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक का उपयोग सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा सकता है लेकिन इसे लागू करते समय पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों का सम्मान अनिवार्य होना चाहिए। सरकार और विपक्ष के बीच जारी यह विवाद देश में डिजिटल सुरक्षा और निजता के अधिकार पर नई बहस को जन्म दे रहा है।

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