नई दिल्ली :- देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया ने लाखों लोगों को सक्रिय कर दिया है और हर कोई यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका एन्यूमरेशन फॉर्म सही तरीके से दर्ज हुआ है या नहीं। कई स्थानों पर लोग अपने बीएलओ से संपर्क कर चुके हैं और फॉर्म भी भर चुके हैं लेकिन फिर भी एक बड़ी दुविधा बनी हुई है कि फॉर्म सही तरह से सबमिट हुआ है या नहीं और क्या जानकारी सही रूप में रिकॉर्ड हो रही है या नहीं। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR प्रक्रिया भविष्य में मिलने वाली विभिन्न सरकारी सेवाओं और दस्तावेजों के लिए आधार तैयार करती है और किसी भी प्रकार की गलती व्यक्ति के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
बीएलओ पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह घर घर जाकर सही जानकारी इकट्ठा करे और उसे समय पर पोर्टल पर अपलोड करे। लेकिन कई जगह ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां लोगों को बीएलओ की ओर से फॉर्म प्राप्त तो हुआ लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि डेटा सफलतापूर्वक सबमिट भी हुआ है या नहीं। ऐसे में लोगों की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि उन्हें अपने दस्तावेजों की स्थिति की पक्की जानकारी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है ताकि हर नागरिक को अपने फॉर्म की स्थिति की सही जानकारी मिल सके और किसी भी प्रकार की गलतफहमी या त्रुटि से बचा जा सके।
कई राज्यों में लोग यह मांग कर रहे हैं कि फॉर्म सबमिशन की स्थिति बताने के लिए एक सार्वजनिक ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने फॉर्म को स्वयं चेक कर सके और किसी त्रुटि की स्थिति में तुरंत सुधार करा सके। इससे न केवल लोगों का भरोसा मजबूत होगा बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी बन सकेगी। जब तक ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं होती तब तक लोगों को अपने बीएलओ से संपर्क में बने रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका फॉर्म प्रक्रिया के अनुसार सही तरीके से दर्ज हुआ है।