नई दिल्ली :- देश के करीब 50 लाख सरकारी कर्मियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग का इंतजार है। केंद्र सरकार ने इसी साल की शुरुआत में इसकी घोषणा की थी और वर्ष समाप्त होने से पहले आयोग का गठन भी कर दिया। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग कब अपनी सिफारिशें पेश करेगा और इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी एवं भत्तों में कितना बदलाव होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशें केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि पेंशन की संरचना, भत्तों की दर और विभिन्न सरकारी योजनाओं में लाभों को भी प्रभावित करती हैं। पिछले 7वें वेतन आयोग के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिले सुधारों ने जीवन स्तर में काफी सुधार किया था, इसी वजह से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर सभी की उम्मीदें बड़ी हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आयोग सभी विभागों और मंत्रालयों से डाटा एकत्र कर रहा है और इसके आधार पर वेतन संरचना में संशोधन की रूपरेखा तैयार करेगा। आयोग के गठन के बाद यह प्रक्रिया आम तौर पर 6 से 12 महीने में पूरी होती है, जिसके बाद केंद्र और राज्य स्तर पर सिफारिशों को लागू किया जाता है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नई सिफारिशें उनकी वित्तीय स्थिति में कितना सुधार लाएंगी और महंगाई दर के मुकाबले उनका वास्तविक लाभ कितना होगा। वहीं सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सिफारिशें वित्तीय रूप से स्थायी और सभी हितधारकों के लिए संतुलित हों।
आने वाले महीनों में 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के साथ ही यह साफ होगा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदों को कितना साकार किया जा सकता है।