नई दिल्ली :- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत की यात्रा पर आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। 2022 में यूक्रेन संघर्ष के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। यह मुलाकात न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में बदलते समीकरणों के बीच एक अहम संदेश भी देगी।
भारत और रूस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं और रक्षा ऊर्जा व्यापार तथा वैज्ञानिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सहभागिता दुनिया भर में महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुतिन की इस यात्रा को द्विपक्षीय रिश्तों में नई ऊर्जा लाने वाला कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग ऊर्जा व्यापार अंतरिक्ष शोध और तकनीकी तालमेल पर विशेष चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष की स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर भी महत्वपूर्ण विचार विमर्श होने की संभावना है।
भारत हमेशा से कूटनीतिक संतुलन की नीति पर चलता आया है और इसी वजह से पुतिन की यात्रा को कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यह मुलाकात भारत के वैश्विक प्रभाव और रणनीतिक स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन की इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि भारत रूस संबंध अभी भी मजबूत आधार पर खड़े हैं और भविष्य में दोनों देशों के लिए कई नए अवसर खुल सकते हैं। आने वाले दिनों में इस उच्चस्तरीय बैठक के एजेंडा और नतीजों को लेकर आधिकारिक जानकारी जारी की जाएगी।