नई दिल्ली :- राइड हेलिंग बाजार अब तक ओला उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों के प्रभाव में रहा है जहां ड्राइवरों को इन प्लेटफार्मों की नीतियों और कमीशन संरचना पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब यह ढांचा बदलने की दिशा में बढ़ रहा है क्योंकि देश में पहली बार ड्राइवर ओन्ड कोऑपरेटिव मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी नामक नया ऐप लॉन्च होने जा रहा है। इस ऐप का उद्देश्य ड्राइवरों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी कमाई पर सीधा नियंत्रण देना है। यह पहल उस समय सामने आ रही है जब निजी कंपनियों की बढ़ती फीस और नीतिगत असमानताओं को लेकर चालकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
भारत टैक्सी का कहना है कि इसके प्लेटफॉर्म पर ड्राइवर ही मालिक होंगे और वे ही फैसले लेंगे। इससे न केवल कमीशन का बोझ कम होगा बल्कि हर राइड से मिलने वाली आय सीधे चालक के हित में जाएगी। यह मॉडल पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर आधारित है जिसके तहत ड्राइवर समुदाय अपनी जरूरतों और समस्याओं के अनुसार नियम तय करेगा। इससे उद्योग में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होने की संभावना है क्योंकि अब तक बाजार में ऐसे विकल्पों की कमी थी जो ड्राइवरों को वास्तविक भागीदारी प्रदान करते हों।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो देश के शहरी परिवहन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह प्लेटफॉर्म उन लाखों ड्राइवरों को आकर्षित कर सकता है जो निजी कंपनियों की शर्तों से परेशान होकर वैकल्पिक विकल्प की तलाश में हैं। उपभोक्ताओं को भी स्थिर किराया बेहतर सेवा और अधिक जिम्मेदार ड्राइवर नेटवर्क का लाभ मिल सकता है। कुल मिलाकर भारत टैक्सी न केवल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है बल्कि डिजिटल परिवहन उद्योग के स्वरूप को भी बदल सकता है। यह कदम भविष्य की उस दिशा की ओर इशारा करता है जहां तकनीक और सामूहिक स्वामित्व मिलकर एक नया न्यायसंगत मॉडल तैयार कर सकते हैं।