बाबरी मस्जिद आधारशिला घोषणा पर बढ़ी राजनीतिक हलचल और कानून व्यवस्था को लेकर राज्यपाल की सख्ती

कोलकाता (पश्चिम बंगाल):- पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्म होती दिखाई दे रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखने की घोषणा ने पूरे प्रदेश में नई बहस छेड़ दी है। इस घोषणा के बाद राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने तुरंत राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। राज्यपाल का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील घोषणा से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है इसलिए प्रशासन को पहले से तैयार रहना बेहद जरूरी है।

 

राज्यपाल ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की उकसाने वाली गतिविधि या भीड़ जुटाने की कोशिश को सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए ताकि प्रदेश में शांति और सद्भाव बना रहे। उनका जोर इस बात पर है कि संवेदनशील तारीख पर कोई ऐसा कदम न उठाया जाए जिससे हालात बिगड़ने की आशंका हो। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि विधायक की घोषणा राजनीतिक आधार पर नहीं बल्कि स्थानीय मांगों के संदर्भ में की गई है और इसे विवाद का रूप देना उचित नहीं है। इस बयानबाजी के बीच विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं और सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं कि वह संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट नीति नहीं अपना रही है।

 

मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने भी हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थान पर भीड़ एकत्र होने की कोशिश पर तुरंत कार्रवाई की जाए। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी तरह की अफवाह से लोग प्रभावित न हों और शांति बनी रहे।

 

इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई सरगर्मी ला दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार राज्यपाल के निर्देशों पर कितना अमल करती है और हालात को किस तरह संभालती है क्योंकि किसी भी प्रकार की चूक राज्य में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती है। कुल मिलाकर यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि धार्मिक और राजनीतिक घोषणाओं का असर कितना व्यापक हो सकता है और इन्हें अत्यंत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ संभालना आवश्यक है।

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