मालेगांव (महाराष्ट्र):- महाराष्ट्र में टीईटी परीक्षा यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन संस्थानों में गहरी नाराजगी दिखाई दी। इसी असंतोष ने आज राज्यभर में बड़े पैमाने पर स्कूल बंद आंदोलन का रूप ले लिया। पुणे और मुंबई जैसे महानगरों के साथ साथ कई जिलों में निजी और अनुदानित स्कूलों ने अपने दरवाजे बंद रखे और टीईटी को अनिवार्य किए जाने के निर्णय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद की। इस आंदोलन में हजारों शिक्षक और शिक्षण संस्थान शामिल हुए जिन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए नए नियमों को अव्यवहारिक और अचानक बताया।
शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक शिक्षण सेवा देने वाले अनुभवी शिक्षकों को भी दोबारा टीईटी परीक्षा देना अनिवार्य कर देना न्याय संगत नहीं है। उनका तर्क है कि अनुभव और वर्षों की मेहनत को केवल एक परीक्षा से नहीं आंका जा सकता और यह फैसला न केवल शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव डालता है बल्कि स्कूलों के नियमित संचालन को भी प्रभावित करता है। कई प्रबंधन समितियों का मानना है कि टीईटी अनिवार्यता का फैसला बिना पर्याप्त चर्चा और जमीनी परिस्थितियों को समझे लिया गया है जो ग्रामीण और छोटे शहरों के स्कूलों के लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर रहा है।
स्कूल बंद आंदोलन के चलते आज बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हुए और अभिभावक भी असमंजस में दिखाई दिए। कई जगहों पर शिक्षकों ने शांतिपूर्ण रैलियां निकालीं और अपनी मांगें शिक्षा मंत्री तक पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपे। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह टीईटी अनिवार्यता पर पुनर्विचार करे और शिक्षकों तथा विद्यालयों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कोई व्यावहारिक समाधान निकाले।
यह आंदोलन केवल एक परीक्षा के विरोध का मुद्दा नहीं है बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में संवाद की आवश्यकता और शिक्षक समुदाय की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नीति निर्माण की मांग को भी सामने लाता है।