नई दिल्ली :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच आयोजित 23वां भारत रूस शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों में नए अध्याय का संकेत माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और कई महाशक्तियों के हित आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों नेताओं की मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत और रूस आज भी एक दूसरे के भरोसेमंद साझेदार हैं और भविष्य की साझा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मजबूत संबंधों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन की भारत यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दौर दोनों देशों के रिश्तों में नए माइलस्टोन स्थापित कर रहा है। ऊर्जा रक्षा अंतरिक्ष तकनीक व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत रूस साझेदारी केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह समय की कसौटी पर खरी उतरी एक मजबूत और संतुलित वैश्विक साझेदारी का मॉडल है।
राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत के साथ संबंधों को विशेष महत्व देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में दोनों देश कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम करेंगे जो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए अहम होंगे। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान सुरक्षा सहयोग और आर्थिक संपर्क को बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रतिबद्धताएं जताईं।
यह शिखर सम्मेलन यह संदेश भी देता है कि भारत और रूस आने वाली चुनौतियों के बीच अपने संबंधों को नई ऊर्जा और नई दिशा देने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों की यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय लाभ के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में संतुलन बनाने की क्षमता भी रखती है।